श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d66
 
 
श्लोक  14.103.d66 
पर्वद्वये चतुर्दश्यामष्टम्यां संध्ययोर्द्वयो:।
आर्द्रायां जन्मनक्षत्रे विषुवे श्रवणेऽथवा।
ये ग्राम्यधर्मविरतास्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी, अष्टमी, दोनों संध्याओं के समय, आर्द्रा नक्षत्र में, जन्म नक्षत्र में, विषुव योग में तथा श्रवण नक्षत्र में स्त्रियों के साथ संभोग नहीं करते, वे लोग भी स्वर्ग जाते हैं।
 
Those people who avoid sexual intercourse with women on Amavasya, Purnima, Chaturdashi, Ashtami, during both the evenings, in Ardra Nakshatra, in Janma Nakshatra, in Equinox Yoga and in Shravan Nakshatra, those people also go to heaven.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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