श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d60
 
 
श्लोक  14.103.d60 
मधुमांसासवेभ्यस्तु निवृत्ता व्रतिनस्तु ये।
परदारनिवृत्ता ये ते नरा: स्वर्गगामिन:॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य मधु, मांस, मदिरा का त्याग करते हैं, उत्तम व्रतों का पालन करते हैं तथा परस्त्री गमन से दूर रहते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।
 
Those who abstain from honey, meat, liquor, observe the best fasts and stay away from the intercourse with another's wife, they go to heaven.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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