श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  14.103.d6 
इदं पठति य: पुण्यं कपिलादानमुत्तमम्।
प्रातरुत्थाय मद्भक्त्या तस्य पुण्यफलं शृणु॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर मेरे प्रति भक्तिपूर्वक इस परम पवित्र एवं उत्तम कपिलादान का माहात्म्य कहता है, उसके पुण्य कर्मों का फल सुनो।
 
Listen to the results of the good deeds of the person who wakes up in the morning and recites the significance of this most pious and excellent Kapila-daan with devotion towards me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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