श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d59
 
 
श्लोक  14.103.d59 
शुश्रूषयाप्युपाध्यायाच्छ्रुतमादाय पाण्डव।
ये प्रतिग्रहनिस्नेहास्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! जो लोग उपाध्याय की सेवा करते हैं और उनसे वेद पढ़ते हैं तथा प्रतिग्रह में आसक्ति नहीं रखते, वे लोग स्वर्ग को जाते हैं।
 
Pandunandan! Those who serve the Upadhyay and read the Vedas from him and do not have any attachment to Pratigrah, those people go to heaven.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas