श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d54
 
 
श्लोक  14.103.d54 
सूचका: संधिभेत्तार: परद्रव्योपजीविन:।
वर्णाश्रमाणां ये बाह्या: पाखण्डाश्चैव पापिन:।
उपासते च तानेव ते सर्वे नरकालया:॥
 
 
अनुवाद
चुगली करने वाले, शांति की शर्तों को तोड़ने वाले, दूसरों के धन से जीविका कमाने वाले, वर्ण और आश्रम के विरुद्ध आचरण करने वाले, पाखंडी, पापी और उनकी सेवा करने वाले, ये सभी नरक में जाते हैं।
 
Backbiters, those who break the terms of peace, those who earn their living from other's wealth, those who behave against the Varna (caste) and Ashrama (system), hypocrites, sinners and those who serve them, all go to hell.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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