श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d53
 
 
श्लोक  14.103.d53 
परदारापहर्तार: परदाराभिमर्शका:।
परदारप्रयोक्तारस्ते वै निरयगामिन:॥
 
 
अनुवाद
जो लोग दूसरे की पत्नी का अपहरण करते हैं, दूसरे की पत्नी के साथ व्यभिचार करते हैं तथा दूसरे की स्त्रियों का अन्य पुरुषों के साथ संबंध बनाते हैं, वे भी नरक में जाते हैं।
 
Those who kidnap another's wife, commit adultery with another's wife, and connect other's women with other men, they also go to hell.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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