श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d52
 
 
श्लोक  14.103.d52 
निरयं ये च गच्छन्ति तच्छृणुष्व युधिष्ठिर॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! अब नरक में जाने वाले मनुष्यों का वर्णन सुनो।
 
Yudhishthira! Now listen to the description of the men who go to hell.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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