श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d42
 
 
श्लोक  14.103.d42 
चिकित्सका देवलका मिथ्यानियमधारिण:।
सोमविक्रयिणश्चापि श्राद्धे नार्हन्ति सत्कृतिम्॥
 
 
अनुवाद
वैद्य, पुरोहित, मिथ्या नियमों का पालन करने वाले (पाखंडी) तथा सोमरस बेचने वाले ब्राह्मण श्राद्ध में सम्मान के अधिकारी नहीं हैं।
 
Physicians, priests, those who follow false rules (hypocrites) and Brahmins who sell Soma juice are not entitled to be honoured in Shraddha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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