श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d27
 
 
श्लोक  14.103.d27 
नासिकायां सदा देवी ज्येष्ठा वसति भामिनी।
श्रोणीतटस्था: पितरो रमा लाङ्गूलमाश्रिता॥
 
 
अनुवाद
नाक में परम सुन्दरी ज्येष्ठा देवी, नितंबों में पितृगण तथा पूँछ में देवी रमा निवास करती हैं।
 
‘The most beautiful Jyeshtha Devi resides in the nose, the ancestors in the buttocks and Goddess Rama in the tail.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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