| श्री महाभारत » पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व » अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन » श्लोक d25-d26 |
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| | | | श्लोक 14.103.d25-d26  | साध्या देवा: स्थिता: कक्षे ग्रीवायां पार्वती स्थिता।
पृष्ठे च नक्षत्रगणा: ककुद्देशे नभ:स्थलम्॥
अपाने सर्वतीर्थानि गोमूत्रे जाह्नवी स्वयम्।
अष्टैश्वर्यमयी लक्ष्मीर्गोमये वसते सदा॥ | | | | | | अनुवाद | | कक्ष में देवता निवास करते हैं, गले में देवी पार्वती, पीठ पर तारे, कूल्हों के स्थान में आकाश, अपान में सभी तीर्थ, मूत्र में स्वयं देवी गंगा और गोबर में आठ ऐश्वर्यों से युक्त देवी लक्ष्मी निवास करती हैं। | | | | The deity resides in the chamber, Goddess Parvati in the neck, the stars on the back, the sky in the place of the hips, all the pilgrimage places in the Apana, Goddess Ganga herself in the urine and Goddess Lakshmi endowed with eight opulences in cow dung. | | ✨ ai-generated | | |
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