श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d24
 
 
श्लोक  14.103.d24 
नासापुटे स्थिता गन्धा: पुष्पाणि सुरभीणि च।
अधरे वसव: सर्वे मुखे चाग्नि: प्रतिष्ठित:॥
 
 
अनुवाद
नासिका में सुगन्धि और सुगंधित पुष्प निवास करते हैं, निचले होंठ में सभी वसु निवास करते हैं और मुख में अग्नि निवास करती है।
 
‘Fragrances and fragrant flowers reside in the nostrils, all the Vasus reside in the lower lip and fire resides in the mouth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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