श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 103: कपिला गौमें देवताओंके निवासस्थानका तथा उसके माहात्म्यका, अयोग्य ब्राह्मणका, नरकमें ले जानेवाले पापोंका तथा स्वर्गमें ले जानेवाले पुण्योंका वर्णन  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  14.103.d13 
यस्यैता: कपिला: सन्ति गृहे पापप्रणाशना:।
तत्र श्रीर्विजय: कीर्ति: स्फीता नित्यं युधिष्ठिर॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जिस घर में ये पापनाशक कपिला गौएँ होती हैं, वहाँ सदैव समृद्धि, विजय और महान यश रहता है।
 
Yudhishthira! In the house where these sin-destroying Kapila cows are present, there is always prosperity, victory and great fame.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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