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श्लोक 14.10.8  |
गन्धर्व उवाच
घोरो नाद: श्रूयतां वासवस्य
नभस्तले गर्जतो राजसिंह।
व्यक्तं वज्रं मोक्ष्यते ते महेन्द्र:
क्षेमं राजंश्चिन्त्यतामेष काल:॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| गंधर्वराज बोले- हे राजन! आकाश में गर्जते हुए इंद्र की गर्जना सुनो। ऐसा प्रतीत होता है कि महेंद्र तुम पर अपना वज्र छोड़ना चाहते हैं; अतः हे राजन! अपनी सुरक्षा और कल्याण का उपाय सोचो। यही उचित समय है। |
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| Gandharvaraj said- O King! Listen to the roar of Indra roaring in the sky. It seems that Mahendra wants to release his thunderbolt on you; therefore, O King! Think of a way for your own safety and well-being. This is the right time for it. |
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