vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 1: युधिष्ठिरका शोकमग्न होकर गिरना और धृतराष्ट्रका उन्हें समझाना
»
श्लोक 15
श्लोक
14.1.15
अभिषेचय राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम्।
स पालयिष्यति वशी धर्मेण पृथिवीमिमाम्॥ १५॥
अनुवाद
"धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर को अपने राज्य में अभिषिक्त करो। वे मन और इन्द्रियों को वश में करके धर्मपूर्वक इस पृथ्वी का पालन करेंगे। 15॥
"Anoint the righteous king Yudhishthir to your kingdom. He will control the mind and senses, hence will follow this earth religiously. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×