श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका शोकमग्न होकर गिरना और धृतराष्ट्रका उन्हें समझाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  14.1.15 
अभिषेचय राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम्।
स पालयिष्यति वशी धर्मेण पृथिवीमिमाम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
"धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर को अपने राज्य में अभिषिक्त करो। वे मन और इन्द्रियों को वश में करके धर्मपूर्वक इस पृथ्वी का पालन करेंगे। 15॥
 
"Anoint the righteous king Yudhishthir to your kingdom. He will control the mind and senses, hence will follow this earth religiously. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)