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श्रेय एवाभिधातव्यं कर्तव्यं च प्रहृष्टवत्॥
तूष्णीम्भावेन वै तत्र न क्रुद्धमभिसंवदेत्।
अनुवाद
सदैव कल्याणकारी बातें ही बोलें और प्रसन्नतापूर्वक कल्याणकारी कर्म करें। यदि कोई संन्यासी क्रोधित हो तो उसके सामने मौन रहें, उससे बात न करें।
Always speak only welfare-oriented things and happily perform welfare-oriented deeds. If a Sanyasi is angry, he should remain silent in front of him and not talk to him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥