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नापराध्येत भिक्षोस्तु न चैवमवधीरयेत्॥
उत्तरं च न संदद्यात् क्रुद्धं चैव प्रसादयेत्।
अनुवाद
किसी भिक्षु के प्रति कभी कोई अपराध न करें, उसकी उपेक्षा न करें, उसके कठोर शब्दों का उत्तर न दें, तथा यदि वह क्रोधित हो तो उसे प्रसन्न करने का प्रयास करें।
Never commit an offence against a bhikshu, never ignore him, never reply to his harsh words, and if he is angry then try to please him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥