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mahabharat 13.99.d89: जो बुद्धिमान और दार्शनिक मनुष्य इसे जानता है, वह कमल के पत्ते की तरह पाप नहीं करता, जो जल से रहित रहता है।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d89
 
 
श्लोक  13.99.d89 
विद्यादेवं हि यो धीमांस्तत्त्ववित् तत्त्वदर्शन:॥
न स लिप्येत पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा।
 
 
अनुवाद
जो बुद्धिमान और दार्शनिक मनुष्य इसे जानता है, वह कमल के पत्ते की तरह पाप नहीं करता, जो जल से रहित रहता है।
 
The intelligent and philosophical man who knows this does not indulge in sins like the lotus leaf which remains free from water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)