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mahabharat 13.99.d70: तत्पश्चात धर्मानुसार पुष्प एकत्रित करें और उन पुष्पों से पूज्य देवताओं का पूजन करें। इसके बाद आश्रम से निकलकर तुरन्त ही किसी अन्य कार्य में लग जाएं।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d70
 
 
श्लोक  13.99.d70 
तत: पुष्पबलिं दद्यात् पुष्पाण्यादाय धर्मत:।
निष्क्रम्यावसथात् तूर्णमन्यत् कर्म समाचरेत्॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात धर्मानुसार पुष्प एकत्रित करें और उन पुष्पों से पूज्य देवताओं का पूजन करें। इसके बाद आश्रम से निकलकर तुरन्त ही किसी अन्य कार्य में लग जाएं।
 
After that, collect flowers according to religion and worship the revered deities with those flowers. After this, leave the ashram and immediately engage in some other work.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)