Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d63-d64: मन, वाणी और कर्म से उन्हें सदैव प्रसन्न रखें। जब संन्यासी खड़ा हो, तो उसकी सेवा करने वाला शूद्र भी खड़ा रहे और जब वह कहीं जा रहा हो, तो उसके पीछे-पीछे चले। यदि वह आसन पर बैठा हो, तो उसे भी भूमि पर बैठना चाहिए। तात्पर्य यह है कि वह सदैव उसके पीछे-पीछे चले। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन, वाणी और कर्म से उन्हें सदैव प्रसन्न रखें। जब संन्यासी खड़ा हो, तो उसकी सेवा करने वाला शूद्र भी खड़ा रहे और जब वह कहीं जा रहा हो, तो उसके पीछे-पीछे चले। यदि वह आसन पर बैठा हो, तो उसे भी भूमि पर बैठना चाहिए। तात्पर्य यह है कि वह सदैव उसके पीछे-पीछे चले।
Always keep them happy through mind, speech and action. When the Sanyasi is standing, the Shudra who serves him should also stand and when he is going somewhere, he should follow him. If he is sitting on a seat, he should also sit on the ground. The meaning is that he should always follow him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥