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mahabharat 13.99.d61: सभी कार्यों में केवल आवश्यक कर्म करके ही दिखावा करना चाहिए। कार्य ऐसे करें जिससे संन्यासी प्रसन्न हो। ऐसा कार्य कभी न करें जो संन्यासी के लिए लाभदायक न हो।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d61
 
 
श्लोक  13.99.d61 
सर्वकार्येषु कृत्यानि कृतान्येव च दर्शयेत्।
यथा प्रीतो भवेद् भिक्षुस्तथा कार्यं प्रसाधयेत्॥
यदकल्पं भवेद् भिक्षोर्न तत् कार्यं समाचरेत्।
 
 
अनुवाद
सभी कार्यों में केवल आवश्यक कर्म करके ही दिखावा करना चाहिए। कार्य ऐसे करें जिससे संन्यासी प्रसन्न हो। ऐसा कार्य कभी न करें जो संन्यासी के लिए लाभदायक न हो।
 
In all tasks, one should only show off by performing the necessary actions. Perform the task in a way that pleases the Sanyasi. Never perform a task that is not beneficial for the Sanyasi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)