Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d60: शूद्र को चाहिए कि वह सदैव नियमानुसार सेवा करने में तत्पर रहे, यज्ञ के योग्य अन्न का ही सेवन करे, मन और इन्द्रियों को वश में रखे तथा अपने कर्तव्यों को सदैव जाने। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शूद्र को चाहिए कि वह सदैव नियमानुसार सेवा करने में तत्पर रहे, यज्ञ के योग्य अन्न का ही सेवन करे, मन और इन्द्रियों को वश में रखे तथा अपने कर्तव्यों को सदैव जाने।
A Shudra should always be ready to serve as per the rules and should always eat food suitable for Yagya. Keep your mind and senses under control and always know your duties.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥