Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d6-d8: पराशर बोले - मनुष्य को चाहिए कि वह जितेन्द्रिय, संयमी, शुद्ध, चंचलता से रहित, बलवान, धैर्यवान, कभी विवाद न करने वाला, लोभरहित, दयालु, सरल, ब्रह्मवादी, सदाचारी और सबका हितैषी होकर सदैव अपने शरीर में निवास करते हुए काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और अहंकार - इन छह शत्रुओं को अवश्य जीत ले। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पराशर बोले - मनुष्य को चाहिए कि वह जितेन्द्रिय, संयमी, शुद्ध, चंचलता से रहित, बलवान, धैर्यवान, कभी विवाद न करने वाला, लोभरहित, दयालु, सरल, ब्रह्मवादी, सदाचारी और सबका हितैषी होकर सदैव अपने शरीर में निवास करते हुए काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और अहंकार - इन छह शत्रुओं को अवश्य जीत ले।
Parashar said - A man should definitely conquer these six enemies - lust, anger, greed, pride, attachment and pride - always living in his own body by being Jitendriya, self-controlled, pure, free from fickleness, strong, patient, never arguing, greedless, kind, simple, a Brahmaist, virtuous and well-wisher of all.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥