Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d42-d43: शुद्र के लिए भी शुचिता का यही विधान बताया गया है, जब वह घर से बाहर (साधु सेवा के लिए) निकलता है। जो शुद्र अपने मन को वश में कर लेता है और जो अपना कल्याण चाहता है, जो यश की कामना करता है, उसे शुचितापूर्वक घर से बाहर निकलकर संन्यासियों के पास जाना चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d42-d43
 
 
श्लोक  13.99.d42-d43 
शूद्रस्यैष विधिर्दृष्टो गृहान्निष्क्रमत: सत:।
नित्यं चालुप्तशौचेन वर्तितव्यं कृतात्मना॥
यशस्कामेन भिक्षुभ्य: शूद्रेणात्महितार्थिना॥
 
 
अनुवाद
शुद्र के लिए भी शुचिता का यही विधान बताया गया है, जब वह घर से बाहर (साधु सेवा के लिए) निकलता है। जो शुद्र अपने मन को वश में कर लेता है और जो अपना कल्याण चाहता है, जो यश की कामना करता है, उसे शुचितापूर्वक घर से बाहर निकलकर संन्यासियों के पास जाना चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए।
 
This method of cleanliness has also been observed for the Shudra when he leaves the house (for the purpose of serving the saint). A Shudra who has controlled his mind and who wishes for his own welfare, such a Shudra who desires good fame, should always go to the Sanyasis after having completed the cleanliness rituals and serve them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)