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पाणिना शुद्धमुदकं संगृह्य विधिपूर्वकम्॥
विप्रुषश्च यथा न स्युर्यथा चोरू न संस्पृशेत्।
अनुवाद
इसके बाद अपने हाथों से शुद्ध जल लेकर मूत्र स्थान को इस प्रकार धोएं कि उसमें मूत्र की एक भी बूंद न रह जाए तथा दोनों जांघों को अशुद्ध हाथों से न छुएं।
After that, take pure water with your hands and wash the urinary area with such care that no drops of urine remain in it and do not touch both the thighs with impure hands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥