Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d14-d16: जो मनुष्य प्राचीन वर्णाश्रमोचित सन्मार्ग का आश्रय लेते हैं, समस्त विपरीत मार्गों को त्यागकर स्वधर्म के मार्ग पर चलते हैं, समस्त जीवों पर दया करते हैं और क्रोध पर विजय प्राप्त करते हैं तथा शास्त्रानुसार भक्तिपूर्वक देवताओं और ब्राह्मणों की पूजा करते हैं, उनके लिए मैं क्रमशः समस्त धर्मों के आत्मसात्करण तथा सेवाभाव आदि की प्राप्ति का उपाय बताता हूँ। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य प्राचीन वर्णाश्रमोचित सन्मार्ग का आश्रय लेते हैं, समस्त विपरीत मार्गों को त्यागकर स्वधर्म के मार्ग पर चलते हैं, समस्त जीवों पर दया करते हैं और क्रोध पर विजय प्राप्त करते हैं तथा शास्त्रानुसार भक्तिपूर्वक देवताओं और ब्राह्मणों की पूजा करते हैं, उनके लिए मैं क्रमशः समस्त धर्मों के आत्मसात्करण तथा सेवाभाव आदि की प्राप्ति का उपाय बताता हूँ।
For those people who take refuge in the ancient Varnashramochita Sanmarga, abandon all the opposite paths and walk on the path of Swadharma, have compassion towards all living beings and overcome anger and worship the Gods and Brahmins with devotion according to the scriptures, for them, I describe the method of assimilation of all the religions and the attainment of the spirit of service, etc. respectively.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥