Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d132: ज्ञानवान मन वाले व्यक्ति को इस सांख्ययोग पर विश्वास करना चाहिए। प्रतिदिन शान्तचित्त रहें, अपने अन्तःकरण को शुद्ध करें और अपने कल्याण का ध्यान रखें। इस प्रकार उपर्युक्त तत्त्वों का चिन्तन करने से मनुष्य को सत्यतत्त्व का ज्ञान हो जाता है और वह बंधनों से मुक्त हो जाता है। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्ञानवान मन वाले व्यक्ति को इस सांख्ययोग पर विश्वास करना चाहिए। प्रतिदिन शान्तचित्त रहें, अपने अन्तःकरण को शुद्ध करें और अपने कल्याण का ध्यान रखें। इस प्रकार उपर्युक्त तत्त्वों का चिन्तन करने से मनुष्य को सत्यतत्त्व का ज्ञान हो जाता है और वह बंधनों से मुक्त हो जाता है।
A person with knowledgeable mind should believe in this Sankhyayoga. Be peaceful every day, purify your conscience and look after your welfare. By thinking about the above mentioned elements in this way, a person becomes aware of the true essence and gets freed from bondage.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥