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mahabharat 13.99.d13: नरक से निकलकर ये निर्दयी और अधार्मिक लोग म्लेच्छ बन जाते हैं और म्लेच्छ बनने के बाद पुनः पाप कर्म करके हमेशा के लिए नरक में चले जाते हैं और पशु-पक्षी आदि योनियों को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  13.99.d13 
ततो म्लेच्छा भवन्त्येते निर्घृणा धर्मवर्जिता:॥
पुनश्च निरयं तेषां तिर्यग्योनिश्च शाश्वती।
 
 
अनुवाद
नरक से निकलकर ये निर्दयी और अधार्मिक लोग म्लेच्छ बन जाते हैं और म्लेच्छ बनने के बाद पुनः पाप कर्म करके हमेशा के लिए नरक में चले जाते हैं और पशु-पक्षी आदि योनियों को प्राप्त होते हैं।
 
On emerging from hell, these ruthless and irreligious people become mlecchas, and after becoming mlecchas, by committing sins again, they go to hell forever and attain the form of animals, birds etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)