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mahabharat 13.99.d122: धैर्य के द्वारा जननेन्द्रिय और उदर की रक्षा करो। नेत्रों के द्वारा हाथ-पैरों की रक्षा करो। मन के द्वारा इन्द्रिय-विषयों की रक्षा करो और मन को बुद्धि में स्थापित करो।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d122
 
 
श्लोक  13.99.d122 
धृत्या शिश्नोदरं रक्षेत् पाणिपादं च चक्षुषा॥
इन्द्रियार्थांश्च मनसा मनो बुद्धौ समादधेत्।
 
 
अनुवाद
धैर्य के द्वारा जननेन्द्रिय और उदर की रक्षा करो। नेत्रों के द्वारा हाथ-पैरों की रक्षा करो। मन के द्वारा इन्द्रिय-विषयों की रक्षा करो और मन को बुद्धि में स्थापित करो।
 
Protect the genitals and abdomen through patience. Protect the hands and feet through the eyes. Protect the sense-objects through the mind and establish the mind in the intellect.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)