Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.99.d101: सर्दी-गर्मी के झगड़ों से अप्रभावित रहो, किसी को नमस्कार मत करो। सांसारिक सुखों और सम्पत्ति से दूर रहो। आसक्ति और अहंकार का त्याग करो। किसी भी जीव पर निर्भर मत रहो। | mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्दी-गर्मी के झगड़ों से अप्रभावित रहो, किसी को नमस्कार मत करो। सांसारिक सुखों और सम्पत्ति से दूर रहो। आसक्ति और अहंकार का त्याग करो। किसी भी जीव पर निर्भर मत रहो।
Remain unaffected by the conflicts of cold and heat, do not greet anyone. Stay away from worldly pleasures and possessions. Give up attachment and ego. Do not depend on any of the living beings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥