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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 98: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानकी प्रशंसा
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श्लोक 2
श्लोक
13.98.2
भीष्म उवाच
स तथा याचमानस्य मुनिरग्निसमप्रभ:।
जमदग्नि: शमं नैव जगाम कुरुनन्दन॥ २॥
अनुवाद
भीष्मजी बोले - कुरुनन्दन! सूर्यदेव से इस प्रकार प्रार्थना करने पर भी अग्नि के समान तेजस्वी जमदग्नि का क्रोध शांत नहीं हुआ॥2॥
Bhishmaji said – Kurunandan! Even after praying to the Sun God like this, the anger of Jamadagni, who was as bright as fire, did not subside. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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