श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 97: छत्र और उपानहकी उत्पत्ति एवं दानविषयक युधिष्ठिरका प्रश्न तथा सूर्यकी प्रचण्ड धूपसे रेणुकाका मस्तक और पैरोंके संतप्त होनेपर जमदग्निका सूर्यपर कुपित होना और विप्ररूपधारी सूर्यसे वार्तालाप  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.97.20 
अथ तं प्रेक्ष्य सन्नद्धं सूर्योऽभ्येत्य तथाब्रवीत्।
द्विजरूपेण कौन्तेय किं ते सूर्योऽपराध्यते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र! उसे युद्ध के लिए तैयार देखकर सूर्यदेव ब्राह्मण का रूप धारण करके उसके पास आये और बोले - 'ब्रह्मन्! सूर्यदेव ने तुम्हारा क्या अपराध किया है?
 
Kunti's son! Seeing him ready for battle, the Sun God took the form of a Brahmin and came to him and said - 'Brahman! What crime has the Sun done to you?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)