Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.96.49: द्विजश्रेष्ठ! विद्वान्! अब अपना यह कमल ग्रहण करो। प्रभु! अनादर करने वाले महर्षि! मेरा अपराध क्षमा करो। 49॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.96.49 
तदिदं गृहृातां विद्वन् पुष्करं द्विजसत्तम।
अतिक्रमं मे भगवन् क्षन्तुमर्हस्यनिन्दित॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! विद्वान्! अब अपना यह कमल ग्रहण करो। प्रभु! अनादर करने वाले महर्षि! मेरा अपराध क्षमा करो। 49॥
 
Dwijshreshtha! Scholar! Now take this lotus of yours. Lord! Disrespectful Maharshi! Forgive my crime. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)