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mahabharat 13.96.46: अगस्त्य बोले—बालसूदन! तुमने जो शपथ ली है, वह आशीर्वाद स्वरूप है। अतः तुमने मेरे कमल पुष्प ले लिए हैं, कृपया उन्हें मुझे लौटा दो। यही सनातन धर्म है॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.96.46 
अगस्त्य उवाच
आशीर्वादस्त्वया प्रोक्त: शपथो बलसूदन।
दीयतां पुष्करं मह्यमेष धर्म: सनातन:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्य बोले—बालसूदन! तुमने जो शपथ ली है, वह आशीर्वाद स्वरूप है। अतः तुमने मेरे कमल पुष्प ले लिए हैं, कृपया उन्हें मुझे लौटा दो। यही सनातन धर्म है॥ 46॥
 
Agastya said—Balasudan! The oath you have taken is in the form of a blessing. Hence you have taken my lotus flowers, please return them to me. This is Sanatana Dharma.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)