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mahabharat 13.96.4-6: राजन! ऐसा निश्चय करके शुक्र, अंगिरा, विद्वान कवि, अगस्त्य, नारद, पर्वत, भृगु, वसिष्ठ, कश्यप, गौतम, विश्वामित्र, जमदग्नि, गालव मुनि, अष्टक, भरद्वाज, अरुन्धती, वालखिल्यगण, शिबि, दिलीप, नहुष, अम्बरीष, राजा ययाति, धुन्धुमार तथा पुरु - ये सभी महान ऋषि और वज्रधारी ब्रह्मर्षि थे। वृत्रहंता शतक्रतु इन्द्र को आगे करके यात्रा पर निकले और सभी तीर्थ स्थानों का भ्रमण करते हुए माघ मास की पूर्णिमा के दिन कौशिकी नदी के तट पर पहुँचे। 4-6॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 4-6
 
 
श्लोक  13.96.4-6 
शुक्रोऽङ्गिराश्चैव कविश्च विद्वां-
स्तथा ह्यगस्त्यो नारदपर्वतौ च।
भृगुर्वसिष्ठ: कश्यपो गौतमश्च
विश्वामित्रो जमदग्निश्च राजन्॥ ४॥
ऋषिस्तथा गालवोऽथाष्टकश्च
भरद्वाजोऽरुन्धती वालखिल्या:।
शिबिर्दिलीपो नहुषोऽम्बरीषो
राजा ययातिर्धुन्धुमारोऽथ पूरु:॥ ५॥
जग्मु: पुरस्कृत्य महानुभावं
शतक्रतुं वृत्रहणं नरेन्द्रा:।
तीर्थानि सर्वाणि परिभ्रमन्तो
माघ्यां ययु: कौशिकीं पुण्यतीर्थाम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजन! ऐसा निश्चय करके शुक्र, अंगिरा, विद्वान कवि, अगस्त्य, नारद, पर्वत, भृगु, वसिष्ठ, कश्यप, गौतम, विश्वामित्र, जमदग्नि, गालव मुनि, अष्टक, भरद्वाज, अरुन्धती, वालखिल्यगण, शिबि, दिलीप, नहुष, अम्बरीष, राजा ययाति, धुन्धुमार तथा पुरु - ये सभी महान ऋषि और वज्रधारी ब्रह्मर्षि थे। वृत्रहंता शतक्रतु इन्द्र को आगे करके यात्रा पर निकले और सभी तीर्थ स्थानों का भ्रमण करते हुए माघ मास की पूर्णिमा के दिन कौशिकी नदी के तट पर पहुँचे। 4-6॥
 
Rajan! Having decided this, Shukra, Angira, the learned poet, Agastya, Narada, Parvat, Bhrigu, Vasistha, Kashyap, Gautam, Vishwamitra, Jamdagni, Galav Muni, Ashtaka, Bharadwaj, Arundhati, Valakhilyagana, Shibi, Dilip, Nahusha, Ambarish, King Yayati, Dhundhumar and Puru - all these great sages and Brahmarshi wielding the thunderbolt. Vritrahanta Shatkratu set out on a journey with Indra in front and after visiting all the places of pilgrimage, he reached the banks of river Kaushiki on the full moon day of Magh month. 4-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)