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अरुन्धत्युवाच
श्वश्र्वापवादं वदतु भर्तुर्भवतु दुर्मना:।
एका स्वादु समश्नातु या ते हरति पुष्करम्॥ ३८॥
अनुवाद
अरुन्धती ने कहा: जिस स्त्री ने आपका कमल ग्रहण किया है, वह अपनी सास की निन्दा करे, अपने पति के प्रति द्वेष रखे तथा अकेले स्वादिष्ट भोजन करे; अर्थात् उसे इन सब पापों का फल भोगना चाहिए।
Arundhati said: The woman who has taken your lotus should slander her mother-in-law, harbor ill-will towards her husband and eat delicious food alone; that is, she should suffer the consequences of all these sins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥