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mahabharat 13.96.35: भारद्वाज बोले: 'जिस पापी ने आपके कमलों को चुराया है, उसे क्रूर और असत्यवादी पुरुषों में होने वाले सभी पापों का सदैव भागी होना चाहिए।' 35.   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.96.35 
भरद्वाज उवाच
सर्वपापसमादानं नृशंसे चानृते च यत्।
तत् तस्यास्तु सदा पापं यस्ते हरति पुष्करम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज बोले: 'जिस पापी ने आपके कमलों को चुराया है, उसे क्रूर और असत्यवादी पुरुषों में होने वाले सभी पापों का सदैव भागी होना चाहिए।' 35.
 
Bharadwaj said: 'May the sinner who has stolen your lotuses forever incur all the sins that exist among cruel and untruthful men.' 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)