Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.96.30: नारदजी बोले, "जिसने आपके चरणकमलों का अपहरण किया है, उसे शरीर को ही अपनी आत्मा समझना चाहिए। उसे मर्यादा का उल्लंघन करके शास्त्र पढ़ना चाहिए। उसे अशब्द बोलने चाहिए और अपने बड़ों का अपमान करते रहना चाहिए, अर्थात उसे उपर्युक्त पापों का भागी बनना चाहिए।" | mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारदजी बोले, "जिसने आपके चरणकमलों का अपहरण किया है, उसे शरीर को ही अपनी आत्मा समझना चाहिए। उसे मर्यादा का उल्लंघन करके शास्त्र पढ़ना चाहिए। उसे अशब्द बोलने चाहिए और अपने बड़ों का अपमान करते रहना चाहिए, अर्थात उसे उपर्युक्त पापों का भागी बनना चाहिए।"
Narada said, "The one who has kidnapped your lotus feet should consider the body as his soul. He should read scriptures by violating the decorum. He should utter voiceless words and keep insulting his elders, i.e. he should become a part of the above mentioned sins. 30.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥