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mahabharat 13.96.21: धुन्धुमार ने कहा- जिसने आपके कमल पुष्पों का अपहरण किया है, उसे अपने मित्रों का उपकार स्वीकार नहीं करना चाहिए। उसे शूद्र जाति की स्त्री से संतान उत्पन्न करनी चाहिए और अकेले ही स्वादिष्ट भोजन करना चाहिए। अर्थात् इन पापों का फल बाँटना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.96.21 
धुन्धुमार उवाच
अकृतज्ञस्तु मित्राणां शूद्रायां च प्रजायतु।
एक: सम्पन्नमश्नातु यस्ते हरति पुष्करम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
धुन्धुमार ने कहा- जिसने आपके कमल पुष्पों का अपहरण किया है, उसे अपने मित्रों का उपकार स्वीकार नहीं करना चाहिए। उसे शूद्र जाति की स्त्री से संतान उत्पन्न करनी चाहिए और अकेले ही स्वादिष्ट भोजन करना चाहिए। अर्थात् इन पापों का फल बाँटना चाहिए।
 
Dhundhumar said- The one who has stolen your lotus flowers should not accept the favours of his friends. He should produce children from a woman of the Shudra caste and eat delicious food alone. That is, he should share the fruits of these sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)