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mahabharat 13.96.2: हे भरतवंश के मुखिया महाराज! पूर्वकाल में कुछ राजाओं और ब्रह्मर्षियों ने भी कमलों के लिए इसी प्रकार चोरी की थी।   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.96.2 
पुष्करार्थं कृतं स्तैन्यं पुरा भरतसत्तम।
राजर्षिभिर्महाराज तथैव च द्विजर्षिभि:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंश के मुखिया महाराज! पूर्वकाल में कुछ राजाओं और ब्रह्मर्षियों ने भी कमलों के लिए इसी प्रकार चोरी की थी।
 
O head of the Bharata dynasty! Maharaj! In the past, some kings and brahmarshis too had stolen in the same way for the sake of lotuses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)