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mahabharat 13.96.16: भृगु बोले - ऋषिवर! जिसने आपका कमल चुराया है, वह गाली खाकर बदले में आपको गाली दे और मार खाने के बाद बदले में आपको भी मारे और दूसरे की पीठ का मांस खाए, अर्थात् उपर्युक्त पापों का भागी बने॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.96.16 
भृगुरुवाच
प्रत्याक्रोशेदिहाक्रुष्टस्ताडित: प्रतिताडयेत्।
खादेच्च पृष्ठमांसानि यस्ते हरति पुष्करम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भृगु बोले - ऋषिवर! जिसने आपका कमल चुराया है, वह गाली खाकर बदले में आपको गाली दे और मार खाने के बाद बदले में आपको भी मारे और दूसरे की पीठ का मांस खाए, अर्थात् उपर्युक्त पापों का भागी बने॥ 16॥
 
Bhrigu said - Sage! The one who has stolen your lotus should abuse you in return after being abused and after being beaten up should also beat you in return and eat the flesh from the other's back, i.e. become a part of the above-mentioned sins.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)