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mahabharat 13.96.12: जब तक समस्त सज्जन पुरुष नीचों के समान महापुरुषों का तिरस्कार करने लगें और जब तक इस संसार में अज्ञानजनित अज्ञान व्याप्त न हो जाए, तब तक मुझे बहुत समय तक परलोक में चले जाना चाहिए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.96.12 
पुरा वरान् प्रत्यवरान् गरीयसो
यावन्नरा नावमंस्यन्ति सर्वे।
तमोत्तरं यावदिदं न वर्तते
तावद् व्रजामि परलोकं चिराय॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जब तक समस्त सज्जन पुरुष नीचों के समान महापुरुषों का तिरस्कार करने लगें और जब तक इस संसार में अज्ञानजनित अज्ञान व्याप्त न हो जाए, तब तक मुझे बहुत समय तक परलोक में चले जाना चाहिए॥12॥
 
Until all the noble men start disregarding the great men like the lowly ones and until the ignorance-induced ignorance does not become prevalent in this world, I should go to the other world for a long time before that.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)