Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.95.92: विश्वामित्र बोले- यातुधानि! ध्यानपूर्वक सुनो, विश्वदेव मेरे मित्र हैं और मैं गौओं तथा सम्पूर्ण जगत का मित्र हूँ। इसीलिए मैं संसार में विश्वामित्र नाम से प्रसिद्ध हूँ॥ 92॥ | mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विश्वामित्र बोले- यातुधानि! ध्यानपूर्वक सुनो, विश्वदेव मेरे मित्र हैं और मैं गौओं तथा सम्पूर्ण जगत का मित्र हूँ। इसीलिए मैं संसार में विश्वामित्र नाम से प्रसिद्ध हूँ॥ 92॥
Vishwamitra said—Yaatudhaani! Listen carefully, Vishwadev is my friend and I am a friend of cows and the entire world. That is why I am famous in the world by the name of Vishwamitra.॥ 92॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥