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mahabharat 13.95.88: भारद्वाज बोले - कल्याणी! जो मेरे पुत्र और शिष्य नहीं हैं, उनका भी मैं पालन करता हूँ। देवताओं, ब्राह्मणों, अपनी पत्नी और द्वाज (वर्ण) लोगों का भी मैं पालन करता हूँ। इसीलिए मैं भारद्वाज नाम से प्रसिद्ध हूँ। 88.   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  13.95.88 
भरद्वाज उवाच
भरेऽसुतान् भरेऽशिष्यान् भरे देवान् भरे द्विजान्।
भरे भार्यां भरे द्वाजं भरद्वाजोऽस्मि शोभने॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज बोले - कल्याणी! जो मेरे पुत्र और शिष्य नहीं हैं, उनका भी मैं पालन करता हूँ। देवताओं, ब्राह्मणों, अपनी पत्नी और द्वाज (वर्ण) लोगों का भी मैं पालन करता हूँ। इसीलिए मैं भारद्वाज नाम से प्रसिद्ध हूँ। 88.
 
Bharadwaj said - Kalyani! I also support those who are not my sons and disciples. I also support the gods, Brahmins, my wife and Dwaj (mixed caste) people. That is why I am famous by the name Bharadwaj. 88.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)