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mahabharat 13.95.84: वशिष्ठ बोले, "मेरा नाम वशिष्ठ है। सबमें श्रेष्ठ होने के कारण लोग मुझे वरिष्ठ भी कहते हैं। मैं गृहस्थ जीवन में रहता हूँ। अतः मेरे धन और निवास के कारण आप मुझे वशिष्ठ ही मानें।"   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  13.95.84 
वसिष्ठ उवाच
वसिष्ठोऽस्मि वरिष्ठोऽस्मि वसे वासगृहेष्वपि।
वसिष्ठत्वाच्च वासाच्च वसिष्ठ इति विद्धि माम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
वशिष्ठ बोले, "मेरा नाम वशिष्ठ है। सबमें श्रेष्ठ होने के कारण लोग मुझे वरिष्ठ भी कहते हैं। मैं गृहस्थ जीवन में रहता हूँ। अतः मेरे धन और निवास के कारण आप मुझे वशिष्ठ ही मानें।"
 
Vasishtha said, "My name is Vasishtha. Being the best among all, people also call me Varishtha. I live in the household life. Therefore, due to my wealth and residence, you should consider me Vasishtha."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)