Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.95.78: यातुधानि ने कहा, "तपस्वीगण! मैं कोई भी हूँ, आपको मेरे विषय में पूछताछ करने का कोई अधिकार नहीं है। केवल इतना जान लीजिए कि मैं इस सरोवर का रक्षक हूँ।" 78   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  13.95.78 
यातुधान्युवाच
यास्मि सास्म्यनुयोगो मे न कर्तव्य: कथंचन।
आरक्षिणीं मां पद्मिन्या वित्त सर्वे तपोधना:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
यातुधानि ने कहा, "तपस्वीगण! मैं कोई भी हूँ, आपको मेरे विषय में पूछताछ करने का कोई अधिकार नहीं है। केवल इतना जान लीजिए कि मैं इस सरोवर का रक्षक हूँ।" 78
 
Yaatudhaani said, "Ascetics! Whoever I may be, you have no right to inquire about me. Just know that I am the protector of this lake." 78
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)