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mahabharat 13.95.75: वे सभी महर्षि पशुसखा के साथ उस कृत्या द्वारा रक्षित मृणाल को लेने के लिए सरोवर के तट पर गए।   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  13.95.75 
पशुसखसहायास्तु बिसार्थं ते महर्षय:।
पद्मिनीमभिजग्मुस्ते सर्वे कृत्याभिरक्षिताम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
वे सभी महर्षि पशुसखा के साथ उस कृत्या द्वारा रक्षित मृणाल को लेने के लिए सरोवर के तट पर गए।
 
Accompanied by Pashusakh, all those great sages went to the bank of the lake to collect Mrinal, which was protected by that Kritya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)