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mahabharat 13.95.74: राजा वृषादर्भि द्वारा भेजा गया एक भयानक यातुधानी कृत्या तालाब की रक्षा कर रहा था।   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  13.95.74 
वृषादर्भिप्रयुक्ता तु कृत्या विकृतदर्शना।
यातुधानीति विख्याता पद्मिनीं तामरक्षत॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
राजा वृषादर्भि द्वारा भेजा गया एक भयानक यातुधानी कृत्या तालाब की रक्षा कर रहा था।
 
A fearsome Yaatudhaani Kritya sent by King Vrishadharbhi was protecting the tank.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)