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mahabharat 13.95.69: तत्पश्चात् वे एक दूसरे से नमस्कार करके कहने लगे कि 'हम लोग अपनी भूख मिटाने के लिए इस वन में विचरण कर रहे हैं' और इस प्रकार वे वहाँ से चले गये।   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  13.95.69 
परिचर्यां वने तां तु क्षुत्प्रतीघातकारिकाम्।
अन्योन्येन निवेद्याथ प्रातिष्ठन्त सहैव ते॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे एक दूसरे से नमस्कार करके कहने लगे कि 'हम लोग अपनी भूख मिटाने के लिए इस वन में विचरण कर रहे हैं' और इस प्रकार वे वहाँ से चले गये।
 
Thereafter exchanging pleasantries with one another, they said, 'We are wandering in this forest to satisfy our hunger,' and so they departed from there together. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)