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mahabharat 13.95.60: सब अंगों से सुगठित उस सुन्दर तपस्वी को देखकर अरुन्धती ने ऋषियों से कहा - "क्या आप कभी ऐसे नहीं हो सकेंगे?"॥60॥   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.95.60 
अरुन्धती तु तं दृष्ट्वा सर्वांगोपचितं शुभम्।
भवितारो भवन्तो वै नैवमित्यब्रवीदृषीन्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
सब अंगों से सुगठित उस सुन्दर तपस्वी को देखकर अरुन्धती ने ऋषियों से कहा - "क्या आप कभी ऐसे नहीं हो सकेंगे?"॥60॥
 
Seeing that handsome ascetic, well built in all parts of the body, Arundhati said to the sages, "Will you never be able to become like this?"॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)