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mahabharat 13.95.52: वहाँ जाकर उन्होंने कठोर नियमों का पालन करते हुए जादुई मंत्रों का उच्चारण करते हुए आहवनीय अग्नि में एक-एक करके आहुतियाँ देनी शुरू कर दीं।   |   mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.95.52 
स गत्वा हवनीयेऽग्नौ तीव्रं नियममास्थित:।
जुहाव संस्कृतैर्मन्त्रैरेकैकामाहुतिं नृप:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ जाकर उन्होंने कठोर नियमों का पालन करते हुए जादुई मंत्रों का उच्चारण करते हुए आहवनीय अग्नि में एक-एक करके आहुतियाँ देनी शुरू कर दीं।
 
Going there and following very strict rules, they began offering oblations one by one in the Āhavanīya fire by reciting magical mantras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)